वो साइबर हमला जिसने अलास्का की 'आंखें खोल दीं'

डिजिटल दुनिया के इस दौर में हर काम ऑनलाइन होता है. सरकारें लोगों को डिजिटल लेन-देन के लिए प्रोत्साहित करती हैं. मेट्रो में सफ़र करें या हवाई जहाज़ से उड़ान भरें, ऑनलाइन टिकट ख़रीदने का चलन बढ़ता जा रहा है. नौकरियों से लेकर शादियां तक ऑनलाइन ढूंढी जा रही हैं.

ऐसे में एक दिन ऐसा हो, जब सारे कंप्यूटर बंद हो जाएं, तो क्या होगा?

ठीक वैसा ही होगा, जैसा अमरीका के अलास्का राज्य के एक शहर मटानुस्का-सुसित्ना में हुआ था.

वहां के बाशिदों को अब तक पता नहीं कि क्या हुआ था. लेकिन, जब ऐसी घटना हुई, तो मैट्सू की सारी व्यवस्था चरमरा गई थी, बल्कि ढेर हो गई थी.

असल में एक वायरस ने मटानुस्का-सुसित्ना के कंप्यूटर नेटवर्क पर हमला किया था. इससे शहर की पूरी व्यवस्था चौपट हो गई थी. डिजिटल होती दुनिया जब पटरी से उतरती है, तो क्या होता है, ये बात मटानुस्का-सुसित्ना पर हुए साइबर हमले से साफ़ हो गई थी.

जब एक वायरस ने मटानुस्का-सुसित्ना के कंप्यूटरों को ठप किया, तो सैकड़ों सरकारी कर्मचारियों के सिस्टम अचानक बंद हो गए.

स्थानीय पुस्तकालयों में लगातार फोन आने लगे कि वो अपने कंप्यूटर फौरन बंद कर दें. यहां तक कि जानवरों को रखने के ठिकानों में दर्ज दवाओं के आंकड़े कंप्यूटर वायरस के ऐसे क़ैदी बने कि वहां के कर्मचारियों को समझ में ही नहीं आ रहा था कि वो बीमार जानवरों को कौन सी दवां दे.

बात सिर्फ़ यहीं तक नहीं रुकी. तैराकी सीखने के ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन की व्यवस्था ठप हो गई. नतीजा ये हुआ कि तैराकी सीखने की चाहत रखने वालों को बुकिंग के लिए क़तार में खड़े होना पड़ा. शहर के एक सरकारी दफ़्तर को तो काम चलाने के लिए पुराने टाइपराइटर निकालने पड़े, ताकि सरकारी अर्ज़ियां निपटाई जा सकें.

हेलेन मुनोज़ नाम की 87 बरस की बुज़ुर्ग महिला, जो सीवेज सिस्टम को बेहतर बनाने की मुहिम चला रही हैं, उन्हें एक दफ़्तर में फ़ोन करने पर जवाब मिला कि उनके कंप्यूटर ठप हो गए हैं.

हेलेन मुनोज़ कहती हैं कि, "इस साइबर हमले ने मटानुस्का-सुसित्ना शहर में सब-कुछ ठप कर दिया था. हक़ीक़त तो ये है कि हमारा शहर अब तक उसके झटके से पूरी तरह नहीं उबर सका है."

मटानुस्का-सुसित्ना शहर को मैट-सू के नाम से ज़्यादा जाना जाता है. अमरीका के उत्तरी राज्य अलास्का का ये शहर आज भी उस साइबर हमले से उबरने की कोशिश कर रहा है. जबकि साइबर अटैक को हुए महीनों बीत चुके हैं. मैट-सू के कंप्यूटरों पर वायरस का हमला जुलाई 2018 में हुआ था.

जब इस साइबर हमले के पहले संकेत मिले, तो किसी को भी ये अंदाज़ा नहीं था कि बात इतनी गंभीर हो जाएगी. शहर के आईटी कर्मचारियों को इस हमले से हुए नुक़सान की सफ़ाई के लिए 20-20 घंटे काम करना पड़ा था, ताकि क़रीब 150 सर्वरों से खुरच-खुरच कर वायरस हमले के अवशेष निकाले जा सकें.

मैट-सू एक ग्रामीण बस्ती है. यहां की आबादी केवल एक लाख है. ऐसे में इस शहर पर साइबर हमला होना अचरज की बात है.

आप को बताते हैं कि पिछले साल जुलाई में आख़िर हुआ क्या था.

23 जुलाई 2018 को मैट-सू के छोटे से मुहल्ले पामर के कर्मचारी रोज़ाना की तरह काम के लिए दफ़्तर पहुंचे. कुछ ही घंटों में वहां के एंटी वायरस ने लोगों को आगाह किया कि सिस्टम में कोई वायरस घुस आया है.

शहर के आईटी निदेशक एरिक वाइट ने अपनी टीम को इस मामले की पड़ताल के लिए कहा. उन्होंने वायरस से जुड़ी कुछ फ़ाइलें पाईं, तो उन्हें डिलीट कर दिया. और सभी कर्मचारियों को अपना लॉग इन और पासवर्ड बदलने को कहा. साथ ही सिस्टम की सफ़ाई का भी काम शुरू कर दिया गया.

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