जब तेंदुए को देखकर मैंने मां को श्रद्धांजलि दी
वो बड़ा ठहरा हुआ सा दिन था. इस बात का कोई इशारा कहीं से नहीं मिला था कि एक बुरी ख़बर बड़ी तेज़ रफ़्तार से मेरी तरफ़ आ रही है.
ये ऐसी बुरी ख़बर थी जो मेरी ज़िंदगी को दो टुकड़ों में बांटने वाली थी. मैं कॉफ़ी और रस्क लेकर अपने कैम्प के बाहर बैठी ही थी.
मैं अफ़्रीकी देश बोत्सवाना के ओकावांगो डेल्टा में एक जंगल सफ़ारी पर निकली थी. मैं इस सफ़ारी पर एक रिपोर्टिंग असाइनमेंट पर आई थी.
सुबह में जंगल की सैर के बाद, मैं थोड़ी देर के लिए ठहर कर उन चीज़ों पर ग़ौर करना चाहती थी जो मैंने अब तक देखी थी.
मैंने जंगल में तरह-तरह के जानवरों का दीदार किया था. पालथी मारे बैठे बबून, दरियाई घोड़े के पैरों के निशान, मक्खियां खाने वाले जीव, हरे रंग के परिंदे.
दो दिन पहले ही हमारे गाइड सिमोन बाइरन मुझे और मेरे साथी फ़ोटोग्राफ़र फेलिक्स ओडेल को दलदली रास्तों से होते हुए यहां लेकर आए थे.
हम जंगल में बड़ी दूर तक आ गए थे. हमारी रातें स्याह नदी के किनारे टेंट में बीत रही थीं. ओकावांगो डेल्टा में तीन क़िस्तों वाले हमारे इस अभियान का ये दूसरा दौर था.
पहला दौर बड़ा शहाना था. जब हम सुबह से शाम तक बड़ी गाड़ियों में सफ़र करते थे. गाड़ी में बैठकर ही हम जंगली जीवों का दीदार करते थे. बारिशों के दिन ख़त्म हो रहे थे.
जंगल में जानवरों की भरमार थी. बरसाती घास पर बसर करने वाले जीव बड़ी तादाद में मौजूद थे. हाथी और जिराफ़ के बच्चे अपनी माओं के साथ लड़खड़ाते चलते दिखते थे.
जंगली सुअर के छोटे बच्चे अपने मां-बाप के पीछे छलांग लगाते अक्सर दिख जाते थे. सवाना का ये मैदान ज़िंदगी से लबरेज़ नज़र आता था.
लेकिन, अब तक हम ने यहां के मशहूर तेंदुए का दीदार नहीं किया था. वो सबसे घात लगाकर शिकार करने वाला जानवर माना जाता है.
बोत्सवाना में तेंदुए को देखने की चाहत मेरे अंदर सबसे ज़्यादा थी. इस सफ़र के अगले हिस्से में हम जंगल के अनदेखे हिस्से में जाने वाले थे.
इस दौरान हमारे साथ कोई गैजेट नहीं था, जो हमारी शांति को भंग कर सके. जंगली पौधों और फूलों की ख़ुशबू पूरे इलाक़े में फैली हुई थी.
मुझे ख़याल आया कि कहीं ये क़ुदरती नशा तो नहीं, जो हमारी नसों में समाया जा रहा है. बाइरन ने हमें बताया कि उसने एक तेंदुए की आवाज़ सुबह के वक़्त सुनी है.
हमें बोत्सवाना में कुछ दिन और गुज़ारने थे. तो, एक उम्मीद जगी कि शायद कोई तेंदुआ हमें दिख जाए. उसी दिन दोपहर में बाइरन को एक संदेश मिला.
सने मुझे कहा कि अपने घर फ़ोन कर लो हमारे पास दुनिया से जुड़ने का एक ही तरीक़ा था, एक सैटेलाइट फ़ोन. मेरे ज़ेहन में किसी अनहोनी की आशंका हुई.
मुझे लगा कि मेरे किसी बच्चे को कुछ हो गया है. लेकिन, जब मैंने घर फ़ोन किया तो, उधर से आवाज़ आई, 'वो शांति से इस दुनिया से विदा हुईं. उनके कष्ट दूर हो गए.'
इसके बाद फ़ोन कट गया. मेरी मां गुज़र गई थीं. फिर भी मुझे एक अजीब सा सुकून था. मैंने उन्हें अपने बोस्टन के घर में अभी एक हफ़्ते पहले ही देखा था.
उस वक़्त न्यू इंग्लैंड में भयंकर बर्फ़ीला तूफ़ान आने वाला था. मैं घर में कॉफ़ी, पॉपकॉर्न और दूसरी खाने-पीने की चीज़ें जमा कर रही थी.
तभी मेरे पिता का फ़ोन आया कि मां ने मेरे पास आने से मना कर दिया है. फिर मैं तूफ़ान के बीच ही मां के पास जाने के लिए रवाना हो गई थी.
मेरी मां पिछले चार साल से अल्ज़ाइमर की शिकार थीं. वो कोई भी ज़बान न बोल पाती थीं और न ही समझ पाती थीं. वो एक अनजाने डर से ग्रस्त थीं.
वो अक्सर अपने परिवार के सदस्यों पर हमला कर देती थीं. जबकि एक वक़्त में चार बच्चों में मैं उनकी सबसे दुलारी बेटी हुआ करती थी.
लेकिन अब वो मुझे या किसी और को नहीं पहचानती थीं. वो जीकर मर रही थीं. मैंने उन्हें बहुत पहले खो दिया था.
अब जब उनकी मौत की ख़बर सुनी तो मुझे उनसे आख़िरी मुलाक़ात की याद आ रही थी. उनका कमरा गर्म था.
मेरे पिता और मेरी एक बहन उनका पसंदीदा संगीत सुना रहे थे. मैंने लेमोनेड में एक फाहा डुबोया और उन्हें चटाया. उन्होंने उसे काट लिया और मुस्कुरा दीं.
ये ऐसी बुरी ख़बर थी जो मेरी ज़िंदगी को दो टुकड़ों में बांटने वाली थी. मैं कॉफ़ी और रस्क लेकर अपने कैम्प के बाहर बैठी ही थी.
मैं अफ़्रीकी देश बोत्सवाना के ओकावांगो डेल्टा में एक जंगल सफ़ारी पर निकली थी. मैं इस सफ़ारी पर एक रिपोर्टिंग असाइनमेंट पर आई थी.
सुबह में जंगल की सैर के बाद, मैं थोड़ी देर के लिए ठहर कर उन चीज़ों पर ग़ौर करना चाहती थी जो मैंने अब तक देखी थी.
मैंने जंगल में तरह-तरह के जानवरों का दीदार किया था. पालथी मारे बैठे बबून, दरियाई घोड़े के पैरों के निशान, मक्खियां खाने वाले जीव, हरे रंग के परिंदे.
दो दिन पहले ही हमारे गाइड सिमोन बाइरन मुझे और मेरे साथी फ़ोटोग्राफ़र फेलिक्स ओडेल को दलदली रास्तों से होते हुए यहां लेकर आए थे.
हम जंगल में बड़ी दूर तक आ गए थे. हमारी रातें स्याह नदी के किनारे टेंट में बीत रही थीं. ओकावांगो डेल्टा में तीन क़िस्तों वाले हमारे इस अभियान का ये दूसरा दौर था.
पहला दौर बड़ा शहाना था. जब हम सुबह से शाम तक बड़ी गाड़ियों में सफ़र करते थे. गाड़ी में बैठकर ही हम जंगली जीवों का दीदार करते थे. बारिशों के दिन ख़त्म हो रहे थे.
जंगल में जानवरों की भरमार थी. बरसाती घास पर बसर करने वाले जीव बड़ी तादाद में मौजूद थे. हाथी और जिराफ़ के बच्चे अपनी माओं के साथ लड़खड़ाते चलते दिखते थे.
जंगली सुअर के छोटे बच्चे अपने मां-बाप के पीछे छलांग लगाते अक्सर दिख जाते थे. सवाना का ये मैदान ज़िंदगी से लबरेज़ नज़र आता था.
लेकिन, अब तक हम ने यहां के मशहूर तेंदुए का दीदार नहीं किया था. वो सबसे घात लगाकर शिकार करने वाला जानवर माना जाता है.
बोत्सवाना में तेंदुए को देखने की चाहत मेरे अंदर सबसे ज़्यादा थी. इस सफ़र के अगले हिस्से में हम जंगल के अनदेखे हिस्से में जाने वाले थे.
इस दौरान हमारे साथ कोई गैजेट नहीं था, जो हमारी शांति को भंग कर सके. जंगली पौधों और फूलों की ख़ुशबू पूरे इलाक़े में फैली हुई थी.
मुझे ख़याल आया कि कहीं ये क़ुदरती नशा तो नहीं, जो हमारी नसों में समाया जा रहा है. बाइरन ने हमें बताया कि उसने एक तेंदुए की आवाज़ सुबह के वक़्त सुनी है.
हमें बोत्सवाना में कुछ दिन और गुज़ारने थे. तो, एक उम्मीद जगी कि शायद कोई तेंदुआ हमें दिख जाए. उसी दिन दोपहर में बाइरन को एक संदेश मिला.
सने मुझे कहा कि अपने घर फ़ोन कर लो हमारे पास दुनिया से जुड़ने का एक ही तरीक़ा था, एक सैटेलाइट फ़ोन. मेरे ज़ेहन में किसी अनहोनी की आशंका हुई.
मुझे लगा कि मेरे किसी बच्चे को कुछ हो गया है. लेकिन, जब मैंने घर फ़ोन किया तो, उधर से आवाज़ आई, 'वो शांति से इस दुनिया से विदा हुईं. उनके कष्ट दूर हो गए.'
इसके बाद फ़ोन कट गया. मेरी मां गुज़र गई थीं. फिर भी मुझे एक अजीब सा सुकून था. मैंने उन्हें अपने बोस्टन के घर में अभी एक हफ़्ते पहले ही देखा था.
उस वक़्त न्यू इंग्लैंड में भयंकर बर्फ़ीला तूफ़ान आने वाला था. मैं घर में कॉफ़ी, पॉपकॉर्न और दूसरी खाने-पीने की चीज़ें जमा कर रही थी.
तभी मेरे पिता का फ़ोन आया कि मां ने मेरे पास आने से मना कर दिया है. फिर मैं तूफ़ान के बीच ही मां के पास जाने के लिए रवाना हो गई थी.
मेरी मां पिछले चार साल से अल्ज़ाइमर की शिकार थीं. वो कोई भी ज़बान न बोल पाती थीं और न ही समझ पाती थीं. वो एक अनजाने डर से ग्रस्त थीं.
वो अक्सर अपने परिवार के सदस्यों पर हमला कर देती थीं. जबकि एक वक़्त में चार बच्चों में मैं उनकी सबसे दुलारी बेटी हुआ करती थी.
लेकिन अब वो मुझे या किसी और को नहीं पहचानती थीं. वो जीकर मर रही थीं. मैंने उन्हें बहुत पहले खो दिया था.
अब जब उनकी मौत की ख़बर सुनी तो मुझे उनसे आख़िरी मुलाक़ात की याद आ रही थी. उनका कमरा गर्म था.
मेरे पिता और मेरी एक बहन उनका पसंदीदा संगीत सुना रहे थे. मैंने लेमोनेड में एक फाहा डुबोया और उन्हें चटाया. उन्होंने उसे काट लिया और मुस्कुरा दीं.
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